बैंक किसानों के खिलाफ बलप्रयोग वाली कार्रवाई नहीं करें- सुप्रीम कोर्ट

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उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि फसल नुकसान के मामले में किसानों से कर्ज वसूलने के लिए वित्तीय संस्थानों को दंडात्मक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए और ऐसे मामलों में सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को कहा कि सरकार का रूख मुआवजा प्रदान करने की बजाए पहले ही एहतियाती कदम उठाने वाले के तौर पर होने चाहिए और किसानों तक संपर्क के लिए 'अंतिम गंतव्य' तक पहुंचना चाहिए।

तमिलनाडु के किसानों की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और एएम खानविलकर की पीठ ने यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा, 'वित्तीय संस्थानों को फसल नुकसान के मामले में किसानों से कर्ज वसूली के लिए बलप्रयोग वाली कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। अगर कोई बल प्रयोग होता है तो सरकार को कदम उठाना चाहिए।' शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार का काम किसानों की आत्महत्या रोकना है मुआवजा बांटना नहीं।

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा से एक तंत्र इजाद करने को कहा जहां किसान फसल नुकसान के कारण कर्ज चुकाने के लिए अपने खिलाफ वित्तीय संस्थानों द्वारा बल प्रयोग होने पर सरकारी मदद के लिए जा सकें। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख चार अगस्त तय करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा।

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