जानिए क्या है शीतला अष्टमी की कथा और महत्व?

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प्रत्येक साल चैत्र महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इसे बसौड़ा अष्टमी भी बोला जाता है। यह होली के आठवें दिन होती है। इस दिन शीतला माता की आराधना की जाती है। इस वर्ष शीतला अष्टमी 4 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन घरों में खाना नहीं बनाया जाता है। मां शीतला को बासी खाना चढ़ाया जाता है। इस दिन का खाना एक दिन पहले की बना लिया जाता है।

शीतला माता की कथा:-

पौराणिक कथा के मुताबिक एक दिन वृद्ध महिला तथा उसकी दो बहुओं ने शीतला माता का उपवास रखा था। प्रथा है कि अष्टमी के दिन बासी चावल माता को चढ़ाए एवं खाए जाते हैं। बहुओं ने सुबह ही ताजा भोजन बना लिया। दोनों की संताने हुई थीं। इस वजह से उन्हें डर था कि बासी खाना हानि पहुंचा सकता है। कुछ वक़्त पश्चात् दोनों महिलाओं के बच्चों की अचानक मौत हो गई। इस बात की खबर प्राप्त होते ही सास ने बहुओं को घर से बाहर निकाल दिया। बच्चों को शवों को लेकर बहुएं घर से निकल गई।

बीच मार्ग में वो एक विश्राम में ठहर गई। वहां उन दोनों को दो बहनें शीतला तथा ओरी मिली। दोनों अपने सिर में जूओं से बहुत परेशान थी। बहुओं ने दोनों बहनों के सिर को साफ कर दिया। शीतला तथा ओरी ने दोनों महिलाओं को आशीर्वाद दिया। ये बात सुन दोनों रोने लगीं तथा अपने बच्चों के शव बताए। ये सब देख शीतला ने बताया कि उन्हें कर्मों का फल प्राप्त हुआ है। ये बात सुन दोनों समझ गई की अष्टमी के दिन ताजा खाना बनाने की वजह से ऐसा हुआ है। ये सब जान बहुओं ने शीतला से क्षमा मांगी। इसके पश्चात् माता ने दोनों बच्चों को फिर जीवित कर दिया।

शीतला अष्टमी शुभ मुहूर्त:-

  • शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त प्रातः 6.08 बजे से शाम 6.41 बजे तक। कुल अवधि 12 घंटे 33 मिनट रहेगी। शीतला सप्तमी शनिवार को मनाई जाएगी।
  • अष्टमी की शुरुआत 4 अप्रैल को प्रातः 4 बजकर 12 मिनट। जबकि समाप्त 5 अप्रैल 2 बजकर 59 मिनट तक।

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