भगवान गणेश को क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी, जानिए

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भगवान गणेश की पूजा में तुलसी को शामिल नहीं किया जाता है। तुलसी भगवान विष्णु की प्रिय होती है। तुलसी के एक रूप शालिग्राम से इनका विवाह हुआ था। हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन तुलसी माता और भगवान विष्णु का विवाह होता है। यह विवाह दिवाली के 11 दिन बाद आने वाली एकादशी को किया जाता है। माना जाता है इस दिन भगवान विष्णु चार महीने बाद नींद से जागते हैं। इस दिन को देवउठनी के नाम से भी जाना जाता है। विष्णु भगवान की प्रिय तुलसी भगवान गणेश को बिल्कुल पसंद नहीं है।

आइए जानते हैं इसके पीछे क्या वजह मानी जाती है। पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार गणेश भगवान गंगा के किनारे तप कर रहे थे और मां तुलसी अपने वर की तलाश में घूम रही थी। जहां माता तुलसी को गंगा किनारे गणेश भगवान दिखाई दिए और वह उन पर मोहित हो गई। उस समय गणेश जी रत्न जड़े सिंहासन पर विराजमान थे। उनके समस्त अंगों पर चंदन लगा हुआ था। गले सोने और मणि-रत्न की माला थी। कमर पर रेशम का पीताम्बर था। तुलसी जी गणेश भगवान के इस रूप को देखकर गणेश पर प्रसन्न हो गई और उनसे विवाह करने का मन बना लिया।

तुलसी माता ने गणेश जी तपस्या भंग कर उनके सामने विवाह करने का प्रस्ताव रखा। तपस्या भंग करने से गणेश जी गुस्सा हो गए और विवाह का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। प्रस्ताव स्वीकार ना करने से तुलसी माता भी गुस्सा हो गई और गणेश जी को श्राप दिया और कहा कि उनके दो विवाह होंगे। इस पर गणेश जी ने भी उन्हें श्राप दिया और कहा कि उनका विवाह एक असुर शंखचूर्ण से होगा। यह श्राप सुनकर तुलसी जी ने गणेश जी से माफी मांगी। तब गणेश भगवान ने कहा कि वह भगवान विष्णु और कृष्ण जी की प्रिय होने के साथ जीवन और मोक्ष देने वाली होंगी। लेकिन मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना अशुभ माना जाएगा

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