इस मंदिर का एक खंभा बना हुआ है पहेली, देखकर हर कोई हैरान

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भारत धर्म, भक्ति, अध्यात्म और साधना का देश है, जहां प्राचीन काल से पूजा-स्थल के रूप में मंदिर विशेष महत्व रखते रहे हैं। यहां कई मंदिर ऐसे हैं, जहां विस्मयकारी चमत्कार भी होते बताए जाते हैं। आज आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जिसका पिलर हवा में झूल रहे है। 16वीं सदी के बना लेपाक्षी मंदिर इसी वजह से दुनिया भर में मशहूर है। इस मंदिर में बहुत सारे स्तंभ है, लेकिन उनमें से एक स्तंभ ऐसा भी है जो हवा में लटका हुआ है। यह स्तंभ जमीन को नहीं छूता और बिना किसी सहारे के खडा है। लोग इस बात की पुष्टि करने के लिए इस स्तंभ के नीचे से कपडा व अन्य चीजें निकालते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है है कि ऐसा करना शुभ माना गया है।

यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और वीरभद्र का है। यहां तीनों भगवानों के अलग-अलग मंदिर मौजूद है। मंदिर के परिसर में नागलिंग की एक बडी प्रतिमा है। माना जाता है कि यह भारत की सबसे बड़ी नागलिंग प्रतिमा है।बताया जाता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता यहां आए थे। जब रावण माता सीता का अपहरण करके अपने साथ लंका ले जा रहा था, तभी गिद्धराज जटायु ने रावण के साथ युद्ध किया। युद्ध के दौरान घायल होकर जटायु इसी स्थान पर गिर गए थे और जब माता सीता की तलाश में श्रीराम यहां पहुंचे तो उन्होंने ले पाक्षी कहते हुए जटायु को अपने गले से लगा लिया। संभवत: इसी कारण तब से इस स्थान का नाम लेपाक्षी पडा। मुख्यरूप से ले पाक्षी एक तेलुगू शब्द है जिसका अर्थ उठो पक्षी है।

आपको बता दें कि इस मंदिर का रहस्य इसके 72 पिलरों में एक पिलर है, जो जमीन को नहीं छूता। इस मंदिर के रहस्यों को जानने के लिए अंग्रेज इसे किसी और स्थान पर ले जाना चाहते थे। इस मंदिर के रहस्यों को देखते हुए एक इंजीनियर ने मंदिर को तोडऩे का प्रयास भी किया था। इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण सन् 1583 में विजयनगर के राजा के लिए काम करने वाले दो भाईयों (विरुपन्ना और वीरन्ना) ने बनवाया था। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इसे ऋषि अगस्त ने बनवाया था।

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