घर के दक्षिण-पूर्व में मोरपंख लगाने से बढ़ती है बरकत

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हिंदू धर्म में मोर को धन की देवी लक्ष्मी के साथ जोडक़र देखा जाता है। लक्ष्मी सौभाग्य, खुशहाली, विनम्रता और धैर्य का प्रतीक मानी जाती हैं इसलिए लोग मोर के पंखों का प्रयोग लक्ष्मी की इन्हीं विशेषताओं को हासिल करने के लिए करते हैं। हिंदू धर्म में मोर को धन की देवी लक्ष्मी के साथ जोडक़र देखा जाता है। यदि घर का द्वार वास्तु नियम के विरुद्ध हो तो द्वार पर तीन मोर पंख स्थापित करें। जिन लोगों की कुण्डली में राहू-केतु कालसर्प योग का निर्माण कर रहे हों उन्हें अपने तकिये के खोल में 7 मोर पंख सोमवार की रात्रि में डालकर उस तकिये का उपयोग करना चाहिए साथ ही शयनकक्ष की पश्चिम दिशा की दीवार पर मोर पंखों का पंखा जिसमें कम से कम 11 मोर पंख लगे हों लगा देना चाहिए, इससे कुण्डली में अच्छे ग्रह अपनी शुभ प्रभाव देने लगेंगे और राहू-केतु का अशुभत्व कम हो जायेगा। अकसर फ्लैट्स में रसोई घर वास्तु के अनुसार नहीं होते। ऐसे में दो मोरपंख रसोईघर में स्थापित करें। मोरपंख भोजन बनाने वाले स्थान से दूर लगाएं। दोनों के नीचे मौली बांध दें और पंखों पर गंगाजल छिड़क कर ॐ अन्नपूर्णाय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा मंत्र से अभिमंत्रित कर स्थापित करें।

घर में मोरपंख रखने से घर का वास्तु प्रभाव बदला जा सकता है। घर के दक्षिण-पूर्व में मोरपंख लगाने से बरकत बढ़ती है और कष्ट नहीं आता।

घर का दरवाजा वास्तु अनुकूल न होने पर दरवाजे पर तीन मोर पंख लगाएं और – ॐ द्वारपालाय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा- मंत्र से अभिमंत्रित कर पंख के नीचे गणपति की छोटी प्रतिमा स्थापित करें।

यदि पूजा स्थान वास्तु अनुकूल नहीं है, तो पूजा स्थान को कुमकुम का तिलक लगे और – ॐ कूर्म पुरुषाय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा।- मंत्र से अभिमंत्रित मोरपंखों से सजाएं। यहां शिवलिंग स्थापित करें।

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