तेलंगाना पनबिजली संयंत्र में आग लगी, नौ लोगों के फंसे होने की आशंका

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हैदराबाद, शुक्रवार, 21 अगस्त 2020। तेलंगाना-आंध्र प्रदेश सीमा पर जमीन के अंदर बने श्रीसैलम पनबिजली संयंत्र में बृहस्पतिवार रात आग लग गई तथा इसमें नौ लोगों के फंसे होने की आशंका है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है लेकिन घटनास्थल से घना धुआं निकल रहा है और इस वजह से बचावकर्मी अंदर नहीं जा पा रहे हैं। नगरकुर्नूल के जिलाधिकारी एल शरमन ने बताया कि तीन अग्निशमन वाहन संयंत्र के परिसर से निकल रहे धुएं को हटाने के काम में लगे हैं। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ बचाव कार्य का जायजा ले रहे हैं।

कन्द्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल से बचाव कार्य में सहयोग देने को कहा है। शरमन ने कहा, ‘‘बहुत घना धुआं है और इसकी वजह से हम संयंत्र परिसर में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। उम्मीद है कि हम सुबह 11 बजे तक संयंत्र में जा पाएंगे।’’ संयंत्र में फंसे नौ लोगों में एक उप अभियंता और एक सहायक अभियंता शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मुख्य ध्येय उन्हें बचाना है.... उनके पास मोबाइल फोन नहीं हैं इसलिए हम उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और वहां मोबाइल नेटवर्क भी नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि प्रारंभिक सूचना के अनुसार आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी होगी।

तेलंगाना स्टेट पॉवर जेनरेशन कॉरपोरेशन (जेनको) के मुख्य अभियंता बी सुरेश के मुताबिक जब हादसा हुआ उस वक्त संयंत्र में कम से कम 25 लोग थे, जिनमें से 15-16 बाहर आने में कामयाब रहे। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि छह लोगों को सांस लेने में दिक्कत के बाद स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कृष्णा नदी पर बना श्रीसैलम लेफ्ट बैंक पॉवर स्टेशन हैदराबाद से करीब दो सौ किलोमीटर दूर है और तेलंगाना स्टेट पॉवर जेनरेशन कॉरपोरेशन (जेनको) इसे संचालित करता है।

संयंत्र में छह इकाइयां हैं जिनकी कुल क्षमता 900 मेगावॉट बिजली उत्पादन की है और पिछले कुछ दिन से बारिश होने से यहां बिजली उत्पादन जोरों से हो रहा था। अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है लेकिन पॉवर हाउस के भूमिगत क्षेत्र में धुआं भरा है जिससे बचाव कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि नीचे फंसे नौ लोगों में से दो लोग उस कंपनी से हैं जो बैटरी के रखरखाव का काम संभालती है। सुरेश ने बताया, ‘‘ संयंत्र में तीन आपात निकास हैं। ऐसी संभावना है कि वे वहां से निकल सकते हैं लेकिन जब तक धुआं समाप्त न हो जाए और बचाव दल अंदर नहीं चला जाए हम कुछ नहीं कह सकते।

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