वास्तुशास्त्र के इन नियमों के अनुसार घर बनाकर आप दूर कर सकते हैं कई तरह की परेशानियां

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कई बार देखा जाता है कि घर में कई असामान्य बाते होती हैं। अगर असामान्य घटनाएं बार-बार हो रही हैं तो इसके पीछे वास्तु दोष हो सकता है। जानकारों का कहना है कि अगर घर को वास्तुशास्त्र के नियमों के मुताबिक नहीं बनाया जाता है तो हमें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप घर को वास्तुशास्त्र के अनुसार बनाते हैं तो घर में खुशहाली आती है। आज हम आपके लिए लाए हैं वास्तुशास्त्र के कुछ खास नियम, जिन्हें अपनाकर आप कई तरह के दोषों से बच सकते हैं। घर की पूर्व दिशा से सूर्य की पहली किरण घर में प्रवेश करती है।

इस दिशा से सकारात्मक ऊर्जा घर में आती है। जानकारों का कहना है कि अगर घर के खिड़की-दरवाजे पूर्व दिशा में हैं तो घर के सदस्यों की उम्र लंबी होती है। इस दिशा को संतान सुख के लिए भी शुभ माना जाता है। पूर्व दिशा में पूजाघर और बेडरूम बनाना शुभ माना जाता है। अगर बच्चे इस दिशा में मुंह करके पढ़ाई करते हैं तो अच्छा माना जाता है। घर के पूर्व भाग को नीचा रखना शुभ माना जाता है। घर की पश्चिम दिशा को सफलता और कीर्ति दिलाने के लिए जाना जाता है। यह दिशा आपके जीवन में सफलता दिलाने के लिए मानी जाती है।

इस दिशा में घर का टॉयलेट, बाथरूम होना शुभ माना जाता है। अगर घर का मेन गेट पूर्व दिशा में है तो घर की उत्तर-पूर्व जगह को खाली छोड़ दें। ऐसा करने से आपकी सेहत अच्छी बनेगी। घर उत्तर दिशा में घर का वॉश बेसिन और बालकनी इसी दिशा में होनी चाहिए। इस दिशा में कभी भी स्टोररूम नहीं बनाना चाहिए। इस दिशा में किसी वजनदार चीज को रखना भी शुभ नहीं माना जाता है। इस दिशा में बच्चों का कमरा, लिवींग रूम, पूजा घर बनाना शुभ माना जाता है। घर की दक्षिण दिशा में शौचालय नहीं होना चाहिए। इस दिशा में मास्टर बेडरूम और तिजोरी बनाना अच्छा माना जाता है। वहीं घर की उत्तर पूर्व दिशआ को जल की दिशा कहते हैं। घर बनाते समय बोरिंग, स्वीमिंग पूल और पूजास्थल को बनाना इस दिशा में शुभ माना जाता है। इस दिशा में पूजा करना काफी शुभ माना जाता है।

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