उच्च शिक्षा को ऑनलाइन करने की रणनीति बनायें- राज्यपाल

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जयपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र ने कहा है कि उच्च शिक्षा को ऑनलाइन करने की रणनीति बनाई जाये। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया कोरोना जैसी महामारी से ग्रस्त है। कोरोना संक्रमण के चलते मानव जीवन में एक ठहराव सा आ गया है। देश और समाज का हर कोना इससे प्रभावित हुआ है। ऐसी ििस्थ्त में वर्तमान परिदृश्य के अनुरूप उच्च शिक्षा को ऑनलाइन करने की रणनीति बनाई जाये। राज्यपाल मिश्र गुरूवार को वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के 34वें स्थापना दिवस समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। ऑनलाइन आयोजित समारोह में राज्यपाल मिश्र ने नवनिर्मित विज्ञान भवन व उद्यमिता एवं कौशल विकास केन्द्र का उद्घाटन किया और संविधान उद्यान का शिलान्यास किया। राज्यपाल ने कहा कि कौशल विकास मानव जीवन की जननी है।

विश्वविद्यालय में बने कौशल विकास केन्द्र से युवा जुडेगे तो उनमें आत्म विश्वास पैदा होगा। अनिश्चतता का भाव भी युवा मन से समाप्त होगा। युवा स्वावलम्बी बन सकेगें। कौशल विकास से राष्ट्र आत्मनिर्भर बनेगा। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था वर्तमान परिर्दश्य में बदलाव के दौर से गुजर रही है। एक शिक्षक की भूमिका में आमूलचूल परिवर्तन करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। पूरे विश्व में सबसे बड़ा डायस्पोरा भारतीय लोगों का है। दुनिया के 28 से ज्यादा देशों में भारतवंशियों ने अपना कीर्तिमान स्थापित किया है। इसमें हर जाति-धर्म के तीन करोड़ से ज्यादा लोग शामिल हैं। उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के कारण उन्नीसवीं शताब्दी में बड़ी संख्या में भारतीय दूसरे देशों में चले गए, लेकिन वे अपनी मूल प्रवृत्तियों से पृथक् नहीं हो सके। मिश्र ने कहा कि सुदूरवर्ती देशों से आज भी भारतवंशियों के माध्यम से ज्ञान की लौ प्रज्ज्वलित हो रही है। ऑनलाइन सेमीनार के माध्यम से जो निष्कर्ष निकलेगा, वह एक नए प्रकाशपुन्ज का दर्शन कराएगा और विश्वपटल पर उपयोगी होगा।

राज्यपाल मिश्र ने कहा है कि संविधान लोकतंत्र का मूल स्तम्भ है, इसलिए विश्वविद्यालयों में संविधान उद्यान बनाने की आवश्यकता है। आमजन को संविधान की जानकारी होना आवश्यक है। राष्ट्रीय एकता, अखण्डता व सामाजिक समस्सता के लिए कत्र्तव्यों का निर्वहन करना होगा। विश्वविद्यालायों में युवाओं को मूल कत्र्तव्यों का ज्ञान कराने के लिए अभियान चलाया जाये। देश की युवा पीढी को मूल कत्र्तव्यों के बारे में बताया जाना आवश्यक है। संविधान के अनुच्छेद 51 क पर विचार-विमर्श करने के लिए गोष्ठियां व सेमीनार भी आयोजित की जायें। 
 

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