रिटायरमेंट के बाद ऐसे रहे फिट एंड फाइन

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रिटायरमेंट के बाद अचानक शारीरिक परेशानी आ सकती है क्योंकि पहले एक नियमित दिनचर्या थी, पूरा दिन भागादौड़ी में गुजरता था, लेकिन बदली दिनचर्या और बंद हुई भागदौड़ परेशानी का कारण बन जाती है. प्रौढ़ावस्था में होने वाली हड्डियों की प्रमुख बीमारियों में घुटनों, कमर और गर्दन का दर्द शामिल है. जिस तरह उम्र बढ़ने के साथ शरीर के अन्य अंगों में परिवर्तन आता है, उसी प्रकार हड्डियां बढ़ने से उनकी बनावट में बदलाव आता है. यह परिवर्तन 40-45 साल के बाद शुरू हो जाता है. रिटायरमेंट के बाद खानपान का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी है. उम्र बढ़ने के साथ खानपान में परिवर्तन की जरूरत होती है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता दुरुस्त रहे.

  • सुबह-शाम कम से कम 10-10 मिनट एक्सरसाइज करें और टहलना ना भूले.
  • पर्याप्त कैल्शियम वाला भोजन करें. हरी सब्जियों की मात्रा अधिक रखें.
  • ब्लडप्रेशर, शुगर की जांच नियमित करायें. कोई समस्या हो तो समय पर उपचार कराएं.
  • अचानक गर्म से ठंड में या ठंड से गर्म में जाने से बचें. ऐसा करने से जोड़ों का दर्द हो सकता है.
  • घुटनों में दर्द होने पर नमक मिले गर्म पानी में तौलिया भिगोकर सिकाई कर सकते हैं.
  • डॉक्टर व फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह पर एक्सरसाइज कर सकते हैं. दर्द निवारक दवा अधिक नहीं लेनी चाहिए.
  • 60 के बाद जल्दी-जल्दी लेकिन कम-कम मात्र में खाना खाते रहना चाहिए. दिन में छह बार खाने के नियम पर अमल करें. तीन बार भारी और तीन बार हल्का खाना चाहिए.
  • बढ़ती उम्र में कब्ज नुकसानदेय है. इससे बचने के लिए फाइबर युक्त खाना खाना चाहिए, जिससे पाचन तंत्र दुरुस्त रहे.
  • खाने में सलाद की मात्र बढ़ानी चाहिए और सेब जैसे फलों को छिलके सहित खाना चाहिए. अगर गाजर या सेब को चबाने में परेशानी होती है तो बारीक काटकर खाया जा सकता है.
  • चोकर वाला आटा, गेंहू, जौ का दलिया आदि खाने में शामिल करना चाहिए.

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