भगवान शंकर ने क्यों लिया था हनुमान जी का अवतार, जानिए

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भगवान शंकर से जुड़े कई प्रसंग बड़े ही प्रसिद्ध हैं। इन प्रसंगों का आए दिन जिक्र होता रहता है। आज हम भी आपको शिव जी से जुड़ा एक रोचक प्रसंग सुनाने जा रहे हैं। यह प्रसंग हनुमान जी के जन्म से जुड़ा हुआ है। कहते हैं कि शिव जी ने कुल 12 रूद्र अवतार लिए हैं। इनमें से हनुमान अवतार को श्रेष्ठ माना गया है। हनुमान जी के जन्म को लेकर कई तरह के किस्से प्रचलित हैं। शास्त्रों में हनुमान जी के जन्म को लेकर दो तिथियां दी गई हैं। पहले में हनुमान जी को भगवान शंकर का अवतार माना गया है। इसके मुताबिक हनुमान जी की मां अंजनी ने शिव जी को घोर तपस्या करके उन्हें पुत्र के रूप में प्राप्त किया था। शास्त्रों में यह उल्लेख मिलता है कि शिव जी ने पवन देव के रूप में अपनी रौद्र शक्ति का अंश यज्ञ कुंड में अर्पित कर दिया था। यह शक्ति अंजनी के गर्भ में प्रविष्ट हुई थी। इस प्रकार से चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ।

यह प्रसंग बहुत ही प्रसिद्ध है और अधिकर लोग इसी में विश्वास करते हैं। इसी आधार पर ऐसा कहा जाता है कि हनुमान जी भले ही राम भक्त हों लेकिन शिव जी से भी उनका गहरा नाता है। हनुमान जी की पूजा करने से शिव जी भी प्रसन्न होते हैं। हनुमान जी के जन्म को लेकर कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं। बताते हैं कि रावण का अंत करने के लिए भगवान विष्णु ने राम जी का अवतार लिया था। ऐसे में प्रभु श्री राम की सेवा के लिए सभी देवताओं ने अलग-अलग रूपों में अवतार लिया। इसी बीच भगवान शंकर ने भी अपना रूद्र अवतार लिया था। दरअसल, शास्त्रों के अनुसार विष्णु जी को दास्य का वरदान प्राप्त था। ऐसे शिव जी हनुमान अवतार में उनका दास्य बनकर आए थे। और रावण वध में अपने प्रभु की मदद की थी।

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