भगवान शिव ने क्यों धरा था हरिहर रूप, जानिए इसकी महत्ता!

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भगवान शिव ने एक बार हरिहर रूप धारण किया था। शिव जी के हरिहर रूप की खास महत्ता बताई गई है। साथ ही शिव के इस रूप को धारण करने के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है। हरिहर दो शब्दों से मिलकर बना है- हरि और हर। यहां पर हरि का तात्पर्य विष्णु और हर का शिव है। यानी कि शिव जी का हरिहर रूप उनके खुद के और विष्णु जी के स्वरूप से मिलकर बना है। इस प्रकार से शिव और विष्णु दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। कई स्थानों पर शिव के हरिहर रूप की आराधना भी की जाती है। कहते हैं कि हरिहर रूप की पूजा करने से शिव और विष्णु दोनों देवता प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद मिलता है। भगवान शिव के हरिहर रूप के बारे में स्कंद पुराण में उल्लेख किया गया है। इसे लेकर एक कथा प्रचलित है। इसके मुताबिक एक बार शिव और विष्णु के भक्त आपस में लड़ने लगे।

इनकी लड़ाई की वजह शिव और विष्णु की श्रेष्ठता को लेकर थी। शिव भक्तों का मानना था कि भोले बाबा के पास ज्यादा शक्तियां हैं और वह ही इस ब्रंहाण्ड में सर्वशक्तिमान हैं। दूसरी तरफ, विष्णु भक्त हरि को ही सर्वशक्तिशाली मान रहे थे। शिव और विष्णु के भक्तों में इस पर विवाद बढ़ता ही गया। कथा के मुताबिक, शिव और विष्णु जी के भक्त इस विवाद को लेकर शंकर जी के पास गए। शंकर जी को यह विवाद बेतुका लगा। शिव जी इन भक्तों को सत्य का ज्ञान कराना चाहते थे। शिव ने सोचा कि भक्तों में देवतागण को लेकर ऐसा कोई विवाद नहीं होना चाहिए। इस पर शिव जी ने हरिहर रूप धारण किया। इस रूप में आधे शिव तो आधे विष्णु जी थे। इसे देखकर भक्त हैरान रह गए। भक्तों को समझ में आ गया कि शिव और विष्णु में अपनी शक्ति को लेकर कभी विवाद नहीं होगा। देवतागण एक-दूसरे के पूरक हैं।

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