महाराष्ट्र सरकार पर भड़के यूपी के मंत्री, कहा, श्रमिकों को जानबूझकर ट्रकों से भेज रही उद्धव सरकार

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लखनऊ, शनिवार, 16 मई 2020। लॉकडाउन में श्रमिकों के पलायन पर उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने महाराष्ट्र की उद्घव सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार जानबूझकर श्रमिकों को ट्रकों में ठूंसकर यूपी भेज रही है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। आईएएनएस से विशेष वार्ता में उप्र के श्रम मंत्री ने कहा कि इस विषम परिस्थिति में खास कर कांग्रेस शासित राज्यों में मजदूरों को बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें खाने-पीने की दिक्कत हो रही है। इसी कारण उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। श्री मौर्या ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार श्रमिकों की दिक्कत दूर करने के बजाय उन्हें जबरदस्ती ट्रकों में भरकर भेज रही है। इसी कारण देश में अफरा-तफरी मची है।

उन्होंने कहा, "दिल्ली सरकार भी मजदूरों के साथ ऐसी ही हरकत कर चुकी है। इस महामारी के समय हर राज्य सरकार को मनवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए श्रमिकों की मदद करनी चाहिए। उनके भरण-पोषण की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्हें पलायन के लिए मजबूर न करें। ट्रकों में भूसा की तरह भरकर भेजने की शरारत करना ठीक नहीं है।" मंत्री ने श्रमिकों से अपील करते हुए कहा, "वे धैर्य रखें, हम उन्हें निकालेंगे। अगर खाने-पीने की कहीं कोई दिक्कत है तो नोडल अफसरों के नंबर जारी किए गए हैं, उनको फोन करें। हम प्रवासी मजदूरों को वापस लाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके लिए बसों और ट्रेनों की व्यवस्था हो रही है। लाखों लोग आ चुके हैं। बाकि सभी को लाना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस दिशा में सर्थक कदम उठा रहे हैं। इसलिए कमगारों को चोरी छिपे अपनी जान-जोखिम में डालकर वापस आने की जरूरत नहीं है।"

श्रम मंत्री ने कहा, "सरकार श्रमिकों को बसों और ट्रेनों के जरिए उनके गृह जनपद तक पहुंचा रही है। लेकिन, जांच और क्वारंटीन के डर से इस तरह चोरी छिपे आना बहुत गलत है। इससे कोरोना का संक्रमण निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में फैलेगा। इससे उनके परिवार और गांव को भी खतरा रहेगा। इसलिए वे धैर्य रखें।" इवेट संस्थानों में वेतन कटौती और श्रमिकों के निकालने के सवाल पर मौर्या ने कहा, "सरकार की नजर सब पर है। लॉकडाउन के दौरान हमने सभी संस्थानों को पत्र भेजकर कहा था कि इस संकट की घड़ी में किसी भी श्रमिक को निकाला नहीं जाना चाहिए। सबके भरण पोषण के अनुदान की व्यवस्था होनी चाहिए। अगर किसी ने मजदूरों को निकाला है, तो सर्वे कराकर हम उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। मजदूरों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा।"

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