'सरदार पटेल को 1947 की कैबिनेट में शामिल नहीं करना चाहते थे नेहरू'- विदेश मंत्री जयशंकर

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नई दिल्ली, गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020। पूर्व विदेश सचिव और मौजूदा केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी बुधवार को नेहरू पटेल विवाद में कूद पड़े। अब तक भारतीय जनता पार्टी के कई नेता देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को देश की कई बड़ी परेशानियों के लिए जिम्मेदार ठहराते रहते रहे हैं और कुछ ठहरा चुके हैं। देश के पहले गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल के बहाने भी नेहरू की नीतियों पर सवाल उठे हैं। ऐसे में मौजूदा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नेहरू की पहली कैबिनेट और सरदार पटेल के बारे में ऐसा बयान दिया है जिससे एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो सकता है। 

विदेश सचिव एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि उन्हें वीपी मेनन की आत्मकथा पढ़कर यह मालूम हुआ कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू 1947 में अपनी पहली केबिनेट में सरदार पटेल को शामिल नहीं करना चाहते थे। जयशंकर ने एक साथ कई ट्वीट करके कहा, नेहरू ने अपनी पहली कैबिनेट लिस्ट से सरदार पटेल का नाम हटा दिया था ऐसे में तब इस मुद्दे पर बहुत बहस हुई थी।

Dr. S. Jaishankar@DrSJaishankar

 · 18 घंटे

Released an absorbing biography of VP Menon by @narayani_basu. Sharp contrast between Patel's Menon and Nehru's Menon. Much awaited justice done to a truly historical figure.

Dr. S. Jaishankar@DrSJaishankar

Learnt from the book that Nehru did not want Patel in the Cabinet in 1947 and omitted him from the initial Cabinet list. Clearly, a subject for much debate. Noted that the author stood her ground on this revelation.

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8:27 pm - 12 फ़र॰ 2020 · New Delhi, India

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विदेश मंत्री ने ट्वीट कर कहा, नारायणी बासु ने वीपी मेनन की जीवनी लिखी है उसे रिलीज किया। इसमें पटेल के मेनन और नेहरू के मेनन में बड़ा अंतर दिखाया गया है। लंबे समय बाद इस महान शख्सियत के साथ न्याय हो सका है। उन्होंने आगे कहा, इस किताब के जरिए  मालूम हुआ कि 1947 में जवाहर लाल नेहरू अपनी पहली केबिनेट में सरदार पटेल को शामिल नहीं करना चाहते थे और अपने मंत्रियों की सूची से उनका नाम हटा दिया था। साफ तौर पर यह उस वक्त चर्चा का विषय था। लेखिका ने इस तथ्य का खुलासा पुख्ता तरीके से किया है। 

केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि राजनीतिक इतिहास लिखते वक्त बेहद ईमानदारी से आकलन किया जाना चाहिए। जब सरदार पटेल का देहांत हुआ तो उनकी यादों को मिटाने के लिए कैंपेन शुरू किया गया था। मैं इस बात से वाकिफ हूं क्योंकि मैंने इसे देखा है और कई बार मैं खुद भी ऐसी स्थितियों का शिकार बना हूं। 

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