जनरल सुलेमानी के जनाजे के जुलूस में भगदड़, 50 से अधिक लोगों की मौत

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तेहरान। ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी के जनाजे के जुलूस में मंगलवार को मची भगदड़ में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 213 अन्य घायल हो गए। ईरान की दो अर्द्ध सरकारी समाचार एजेंसियों फार्स और आईएसएनए ने यह जानकारी दी है। दोनों एजेंसियों ने ईरान की आपात चिकित्सा सेवा के प्रमुख पीरहुसैन कुलीवंद के हवाले से जानकारी दी कि भगदड़ रिवॉल्यूशनरी गार्ड के जनरल सुलेमानी के गृह नगर करमान में मची है। सैन्य कमांडर शुक्रवार को इराक में हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए थे। भगदड़ क्यों मची इस संबंध में अभी कोई सूचना नहीं है। ऑनलाइन पोस्ट किए गए शुरुआती वीडियो में सड़कों पर शव नजर आ रहे हैं और अन्य मदद की गुहार लगा रहे हैं। 

ANI@ANI

Mourners dead in stampede at Iran's senior commander Qassem Suleimani's funeral, reports AFP News Agency

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3:30 PM - Jan 7, 2020

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कुलीवंद ने पहले कहा था, ‘‘दुर्भाग्यवश जनाजे के जुलूस में मची भगदड़ में हमारे कुछ हमवतन घायल हो गए हैं और कुछ की मौत हो गई है।’’ अर्द्ध सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईएसएनए’ की खबर के अनुसार, सरकार ने बाद में करमान में एकत्र भारी भीड़ का हवाला देते हुए सुलेमानी को दफन किए जाने को टाल दिया। उसने स्पष्ट नहीं किया कि उनका अंतिम संस्कार कब किया जाएगा। राजधानी तेहरान में जनाजे के जुलूस में सोमवार को करीब 10 लाख लोग शामिल हुए थे। सुलेमानी की मौत के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण हैं और ईरान में अमेरिका से बदला लेने की मांग जोर पकड़ चुकी है। इसबीच अमेरिकी वायुसेना ने उटा में 52 लड़ाकू विमानों के साथ सैन्य अभ्यास शुरु किया है। 

गौरतलब है कि अभ्यास शुरु होने के कुछ ही दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में 52 जगहों को निशाना बनाने की धमकी दी थी। उधर, अमेरिका सरकार ने पश्चिम एशिया के जलक्षेत्र में जहाजों को आगाह किया है कि क्षेत्र में अमेरिकी समुद्री हितों के खिलाफ ईरान की ओर से कार्रवाई की आशंका है। अमेरिकी समुद्री प्रशासन ने मंगलवार को यह चेतावनी जारी की। इसमें ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड जनरल कासिम सुलेमानी के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद पैदा होते खतरे का हवाला दिया गया है। ईरान की संसद ने मंगलवार को एक विधेयक पारित कर सभी अमेरिकी बलों को ‘‘आतंकवादी’’ घोषित किया।संसद ने कहा, ‘‘सैन्य, खुफिया, वित्तीय, तकनीकी, सेवा या साजो सामान सहित इन बलों को कोई भी सहायता, आतंकवादी कार्य में सहयोग के रूप में मानी जाएगी।’’

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