सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की हो न्यायिक जांच- मायावती

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लखनऊ, रविवार, 05 जनवरी 2020। बसपा अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) के खिलाफ हाल में हुई हिंसा में बिना जांच- पड़ताल किये निर्दोष लोगों को जेल भेजने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। मायावती ने रविवार को  ट्वीट  कर कहा कि उत्तर प्रदेश में सीएए और एनआरसी के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में बिना जाँच- पड़ताल के ही विशेषकर बिजनौर, सम्भल, मुजफ्फरनगर, मेरठ, फिरोज़ाबाद तथा अन्य कुछ ज़िलों में भी निर्दोषों को जेल भेज दिया गया है। इसे मीडिया ने भी उजागर किया है। यह अति-शर्मनाक और निन्दनीय है।

उन्होंने सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की तमाम वारदात की न्यायिक जाँच करने की मांग करते हुए कहा कि इस सिलसिले में बसपा का एक प्रतिनिधिमण्डल सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को एक ज्ञापन सौंपेगा। प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी मांग की कि योगी सरकार हिंसा के आरोप में पकड़े गये बेगुनाह लोगों को फौरन छोड़े, अपनी गलती की माफी मांगे और हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों के परिवारों की मदद करे। मालूम हो कि पिछले महीने सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत करीब 20 जिलों में पुलिस और बलवाइयों के बीच संघर्ष हुआ था। इसमें करीब 19 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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