मूडीज ने भारत की रेटिंग को घटाकर किया नेगेटिव, वित्त मंत्री ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

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मूडीज इन्वेस्टर्स र्सिवस ने भारत की रेटिंग पर अपना परिदृशय़ बदलते हुए इसे ‘स्थिर’ से ‘नकारात्मक’ कर दिया है। एजेंसी ने कहा कि पहले के मुकाबले आर्थिक वृद्धि के बहुत कम रहने की आशंका है।  एजेंसी ने भारत के लिए बीएए 2 विदेशी-मुद्रा एवं स्थानीय मुद्रा रेटिंग की पुष्टि की है। रेटिंग एजेंसी ने एक बयान में कहा, परिदृशय़ को नकारात्मक करने का मूडीज का फैसला आर्थिक वृद्धि के पहले के मुकाबले काफी कम रहने के बढ़ते जोखिम को दिखाता है। मूडीज के पूर्व अनुमान के मुकाबले वर्तमान की रेटिंग लंबे समय से चली आ रही आर्थिक एवं संस्थागत कमजोरी से निपटने में सरकार एवं नीति के प्रभाव को कम होते हुए दिखाती है। जिस कारण पहले ही उच्च स्तर पर पहुंचा कर्ज का बोझ धीरे-धीरे और बढ़ सकता है।

वित्त मंत्री ने दिय बयानः

सरकार ने मूडीज इन्वेस्टर्स र्सिवस के भारत की रेटिंग का परिदृशय़ स्थिर से घटाकर नकारात्मक करने पर शुक्रवार को कड़ी प्रतिक्रिया जताई। वित्त मंत्रलय ने कहा कि अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारक मजबूत बने रहेंगे और सरकार की ओर से किए गए उपायों से निवेश में तेजी आएगी। मूडीज के रेटिंग परिदृशय़ को स्थिर से नकारात्मक  करने के बाद वित्त मंत्रलय ने बयान जारी करके कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत की आपेक्षिक स्थिति स्थिर बनी हुई है।

वित्त मंत्रलय ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के हालिया विश्व आर्थिक परिदृशय़ का हवाला देते हुए कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2019 में 6.1 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है और यह 2020 में बढक़र सात प्रतिशत पर पहुंच सकती है। इसमें कहा गया है कि भारत की संभावित वृद्धि दर स्थिर बनी हुई है। आईएमएफ और अन्य बहुपक्षीय संगठनों का भारत को लेकर दृष्टिकोण लगातार सकारात्मक बना हुआ है।

मंत्रलय ने कहा कि सरकार ने पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए वित्तीय क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में कई उपाय किए हैं। वित्त मंत्रलय ने कहा ,  वैश्विक सुस्ती से निपटने के लिए सरकार ने खुद आगे बढक़र नीतिगत फैसले लिए हैं। इन उपायों से भारत को लेकर सकारात्मक रुख बढ़ेगा। साथ ही पूंजी प्रवाह को आर्किषत करने में मदद मिलेगी तथा निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। बयान में कहा गया,  मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहने और बॉन्ड प्रतिफल कम रहने से अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारक मजबूत बने रहेंगे। भारत अल्प और मध्यम अवधि में वृद्धि की मजबूत संभावनाओं की पेशकश लगातार कर रहा है। 

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